सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया;दिसंबर के अंत तक 20 से 30 करोड़ वैक्सीन तैयार हो जाएगी

नई दिल्लीसीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के कार्यकारी निदेशक डॉ सुरेश जाधव ने कहा है कि दिसंबर अंत तक भारत में 20 से 30 करोड़ कोविद 19 की खुराक की तैयार होगी और अंतिम ट्रायल के बाद वैक्सीन मार्च 2021 तक उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि डीसीजीआई द्वारा लाइसेंस देने के बाद उत्पाद को बाजार में लॉन्च किया जा सकता है। सीरम संस्थानकोरोनावायरस खतरे से निपटने के लिए पांच अलग-अलग उत्पाद पर काम कर रहा है।

जानें, वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगा तो क्या होगा?

एचएएल फाउंडेशन के संस्थापक डॉ स्वदीप श्रीवास्तव के सवाल पर डॉ. जाधव ने कहा कि वैक्सीन के विकास प्रक्रिया में कुछ ठहराव आए, जिसके चलते ट्रायल कुछ समय के लिए रोक दिया गया, जिसे बाद में तीन सप्ताह तक बढ़ाया गया था, क्योंकि कुछ नियामक तीसरे चरण के ट्रायल में शामिल लोगों के स्वास्थ्य को लेकर स्पष्टता चाहते थे। इसलिए सीरम दिसंबर के अंत तक सभी क्लीनिकल तीसरे चरण के परीक्षणों के डेटा डीसीजीआई को पेश करने में सक्षम होगा।

एक महीने के भीतर आपातकालीन उपयोग लाइसेंस दे सकता है DCGI

बकौल डा. जाधव, अगर डीसीजीआई संतुष्ट होता है, तो वह हमें एक महीने के भीतर आपातकालीन उपयोग लाइसेंस (आईयूएल) दे सकता है या डीसीजीआई द्वारा विपणन प्राधिकरण भी दिया जा सकता है। इसके बाद सीरम संस्थान प्रीक्वालिफिकेशन के लिए डब्ल्यूएचओ में जाएगा, क्योंकि प्रीक्वालिफिकेशन के बाद ही गेवी जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन इस उत्पाद को खरीदेंगे।

उन्होंने कहा कि सीरम संस्थान डीसीजीआई और डब्ल्यूएचओ संग एक साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है ताकि समय की बचत हो सके। ये सभी काम 2021 की पहली तिमाही तक पूरे हो जाएंगे और उसके बाद सीरम संस्थान द्वारा निर्मित टीका जनता के लिए उपलब्ध हो सकेगी। डॉ. जाधव के मुताबिक दिसंबर 2020 तक सीरम इंस्टीट्यूट में 20 से 30 करोड़ वैक्सीन की खुराक तैयार होंगे और एक बार सभी की अनुमति मिल जाने के बाद वह प्रति माह 6 से 7 करोड़ खुराक का उत्पादन करेगा।

वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है: डॉ. जाधव

डॉ. जाधव ने बताया कि वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन यह देखना होगा कि प्रशासित होने के बाद कोविद वैक्सीन के साथ प्रतिरक्षा कितनी देर तक टिकती है। उन्होंने कहा कि इसकी निगरानी में ही 2 से 3 साल लग जाएंगे। HEAL फाउंडेशन द्वारा आयोजित फार्मा एक्सीलेंस ई समिट 2020 में संबोधित करते हुए डॉ जाधव ने SII के सीईओ अदार पूनावाला के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि सीरम एक साल में 70 से 80 करोड़ वैक्सीन खुराक का उत्पादन कर सकता है। डॉ. जाधव ने आगे यह भी कहा कि सीरम उत्पादन को बढ़ा भी सकता है, लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा।

भारत को तीन फार्मा कंपनियां कोविद वैक्सीन निर्माण में शामिल हैं

डा. जाधव ने बताया कि भारत को तीन फार्मा कंपनियों का सौभाग्य प्राप्त है, जो कोविद वैक्सीन निर्माण में शामिल हैं, जिनमें से दो क्लिीनिकल परीक्षणों के तीसरे चरण 3 में हैं, जबकि एक दूसरे चरण में है। उन्होंने बताया कि क्लिीनिकल परीक्षण के तीसरे चरण के परिणाम दिसंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में सीरम संस्थान को उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही डेटा को रद्द कर दिया जाएगा और इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को लाइसेंस के लिए पेश किया जाएगा।

आमतौर पर वैक्सीन को बाजार में हिट होने में 8 से 10 साल लगते हैं

गौरतलब है पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड कोविद -19 वैक्सीन कैंडीडेटट कोवाशिल्ड के निर्माण के लिए एस्ट्राजेनेका के साथ पार्टनरशिप की है। कंपनी भारत में कोवाशील्ड के दूसरे और तीसरे चरण का मानव क्लिीनिकल ट्रायल भी कर रही है। डॉ. जाधव ने आगे कहा कि आमतौर पर किसी भी वैक्सीन को बाजार में हिट होने में 8 से 10 साल लगते हैं। यह तीसरी बार है कि भारत को जल्द से जल्द टीके की आवश्यकता है।

एच 1 एन 1 के प्रकोप के दौरान 6 महीने में लांच कर दिया था वैक्सीन

इससे पहले एच 1 एन 1 के प्रकोप के दौरान ऐसा हुआ था। वर्ष 2009 में जून और जुलाई में मैक्सिको से आए एच1 एन1 फ्लू आया था और दिसंबर 2009 तक टीके लॉन्च कर दिया गया था। यह इसलिए संभव हुआ था, क्योंकि डब्ल्यूएचओ से लगातार अपडेट हो रहा था। वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया और उसके तौर-तरीके पहले से मौजूद थे, इसलिए H1N1 वैक्सीन को तेजी से लॉन्च किया जा सका था।

इबोला प्रकोप के दौरान परीक्षण के द्वितीय चरण लांच कर दिया गया टीका

दूसरी बार यह अफ्रीका और दुनिया के अन्य हिस्सों में इबोला के प्रकोप के दौरान हुआ। डॉ. जाधव ने बताया कि इबोला वैक्सीन को तब लॉन्च किया गया था जब टीके का परीक्षण द्वितीय चरण में था। यह पहली बार है कि दुनिया को कोरोना वायरस के बारे में कुछ भी नहीं पता था, लेकिन सौभाग्य से इसके तौर-तरीके मालूम थे। मसलन, जब यह वायरस वुहान (चीन) से आया तो यह किस प्रकार की बीमारी है, यह मानव को कैसे प्रभावित करता है और यह कैसे फैलता है, पहले से ज्ञात हो चुका था। उन्होंने कहा कि अगर हम सामान्य तरीके से वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया जाते तो कम से कम 7 से 8 महीने के अतिरिक्त समय में वैक्सीन उपलब्ध होता।

कंपनी ने थोक में वैक्सीन निर्माण की अनुमति के लिए केंद्र को धन्यवाद किया

उन्होंने अंतिम परीक्षण पूरा होने से पहले ही थोक में कोविद -19 वैक्सीन के निर्माण के लिए दवा कंपनियों को अनुमति देने के लिए केंद्र को धन्यवाद दिया, जो बिना किसी देरी के जनता को वैक्सीन की त्वरित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए तय किया गया था। उन्होंने अपने वैश्विक कोरोनावायरस वैक्सीन कार्यक्रम कोवैक्स के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को भी धन्यवाद दिया।

सबसे बड़ा सवाल, पहले किसे मिलेगा वैक्सीन की खुराक?

डॉ. जाधव ने कहा कि भारत की 50 फीसदी आबादी 55 वर्ष से कम आयु की है और परीक्षण 18 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में किए जा रहे हैं। इसलिए भारत में वैक्सीन पाने वाले पहले लोग स्वास्थ्य कार्यकर्ता होंगे। दूसरे नंबर पर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीरम द्वारा निर्मित टीका गावी के साथ अनुबंधित है, जो 50-50 फीसदी के आधार पर गावी और भारत की होगी।

वैक्सीन निर्माण के लिए भारत को मिलता है पैसा, तकनीक, वैज्ञानिक इनपुट

गौरतलब है संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा होने के नाते भारत केवल भारतीय जनसंख्या का ध्यान नहीं रख सकता है। चूंकि कोविद की स्थिति भारत के लिए विशिष्ट नहीं है, इससे पूरी दुनिया में 750 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। वैक्सीन निर्माण के लिए भारत को पैसा, तकनीक, वैज्ञानिक इनपुट मिलता है। डॉ। जाधव ने हस्ताक्षर किए। इसलिए इस संकट के समय में उनकी मदद करना हमारी पूरी जिम्मेदारी है।

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