पोल खुलने की डर से जनपद सीईओ द्वारा सूचना का अधिकार के तहत नही दी गई जानकारी, आवेदक ने जिला पंचायत में किया प्रथम अपील…

भुपेश मांझी कोरबा/पाली:- पाली जनपद पंचायत में इन दिनों सूचना का अधिकार कानून की जमकर धज्जियां उड़ाते हुए जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने में कोताही बरत रहे है।जिसके कारण उक्त कानून जनपद कार्यालय में मजाक बनकर रह गया है।रतखंडी पंचायत के सचिव चंद्रिका प्रसाद तंवर द्वारा तत्कालीन महिला सरपंच श्रीमती सरस्वती देवी के फर्जी हस्ताक्षर से बीते 16 जनवरी 2020 को 2 लाख एवं 03 फरवरी को 1 लाख की राशि 14 वे वित्त मद से आहरण करके गबन कर दिए जाने मामले की तत्कालीन सरपंच द्वारा सीईओ एमआर कैवर्त से 30 जून को किये गए लिखित शिकायत के आधार पर सीईओ द्वारा जांच टीम गठित कर और जांच के नाम पर महज निभाई गई औपचारिता की प्रक्रिया को लेकर पाली निवासी भूषण श्रीवास द्वारा 18 अगस्त 2020 को सूचना का अधिकार के तहत जांच टीम द्वारा किये गए जांच का प्रमाणित प्रतिवेदन का मांग किया गया था।जहाँ बीते 26 अगस्त 2020 को सीईओ द्वारा जारी डॉक प्रपत्र जो आवेदक को 11 सितंबर को प्राप्त हुआ जिसमें यह उल्लेखित कि शिकायत के जांच का जांच प्रतिवेदन आज दिनाँक तक कार्यालय को अप्राप्त है जिसकी जानकारी उपलब्ध कराना असंभव है अतः आवेदन को निरस्त किया जाता है।और इस प्रकार किये गए औपचारितापूर्ण जांच का पोल खुलने के डर से आवेदक को गुमराह करते हुए चाही गई जानकारी नही दिया गया।आवेदक द्वारा जनपद कार्यालय के जवाब से असंतुष्ट होकर बीते 18 सितंबर 2020 को जिला पंचायत में प्रथम अपील के माध्यम से जानकारी का मांग किया गया है।आवेदक भूषण श्रीवास ने कहा है कि यदि जिला पंचायत कार्यालय से भी जानकारी उपलब्ध नही कराई जाती है तो नियमानुसार राज्य सूचना आयोग रायपुर को द्वितीय अपील करेगा।

यहाँ पर यह उल्लेख करना लाजिमी ना होगा कि जिस शातिर सचिव चंद्रिका प्रसाद द्वारा तत्कालीन सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर से 14वे वित्त का राशि गबन किया गया।इसके पहले भी उक्त सचिव ने ग्राम पंचायत लाफा में दूसरे सचिव के कार्यकाल के दौरान विगत 3 फरवरी 2015 को ग्रामीण बैंक के कटघोरा शाखा से भी शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत 08 लाख की राशि का दो किश्तों में क्रमश प्रथम 3 लाख 90 हजार एवं द्वितीय 4 लाख 10 हजार आहरित कर गबन कर दिया था।जिसकी शिकायत पर भी पाली जनपद से कोई कार्यवाही नही किया गया था और तब ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ से लिखित शिकायत किया था।जिसके आधार पर पाली सीईओ को जांच का जिम्मा सौंपा गया था।लेकिन जांचकर्ता अधिकारियों द्वारा मिलकर उस समय भी सचिव के भ्रष्ट्राचार पर पर्दा डालते हुए क्लीनचिट दिया गया था।तब से लेकर आज तक भष्ट्राचार में लिप्त सचिव के हौसले काफी बुलंद हो चले है और इसी की परिणीति है कि उक्त बेलगाम सचिव अपनी हरकतों से बाज नही आ रहा है।

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