प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण जी की प्रतिमा जयस्तम्भ चौक पर स्थापित हो-दीनू नेताम

रायपुर-छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीरनारायण सिंह जी जिनका जन्म छत्तीसगढ़ सोनाखान जिला बलौदाबाजार में हुआ था । वीर नारायण सिंह का जन्म सन् 1795 में सोनाखान के जमींदार रामसाय के हर हुआ था। वे बिंझवार आदिवासी समुदाय के थे, उनके पिता ने 1818-19 के दौरान अंग्रेजों तथा भोंसले राजाओं के विरुद्ध तलवार उठाई लेकिन कैप्टन मैक्सन ने विद्रोह को दबा दिया। … पिता की मृत्यु के बाद 1830 में वे सोनाखान के जमींदार बने। सन 1856 में सोना खान में अकाल पड़ने पर उनकी प्रजा भुखमरी एवं अनाज की कमी झेल रहे थे और वहां साहूकारों एवं अंग्रेजों ने आम जनता को अनाज देने से मना कर दिया था और सभी अनाजों को अंग्रेजों द्वारा गोदामों में रखवा दिया गया था ।

अपनी जनता को भूखे मरते देख उनकी पीड़ा उनसे नहीं सही गयी जिसके चलते शहीद वीरनारायण सिंह ने साहूकारों तथा अंग्रेजों के गोदामों को लूटकर अनाजों को जनता के बीच मे बांट दिया जो कि अंग्रेजों को नगवार हुई इसके विरोध में अंग्रेजी हुकूमत में उनके ऊपर कार्यवाही करते हुए 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तम्भ चौक पर उन्हें बीच चौराहे पर सरेआम फांसी दे दी गयी। ऐसे देशभक्त और छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जिन्होंने अपने लोगों के लिए हंसते हंसते अपने प्राण निछावर कर दिए । ऐसे महापुरुष जिनको रायपुर के जयस्तम्भ चौक में फांसी दी गयी । सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रांतीय उपाध्यक्ष दीनू नेताम ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की प्रतिमा उनके शहादत स्थल पर लगाने की मांग की है तथा इस मांग को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है ।

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