अन्तः व्यवसाय निगम कोरबा में भ्रष्टाचार या घोर लापरवाही? जरूरतमंद लोग लाभ से वंचित

भूपेश मांझी कोरबा- 13 सितंबर। अंत्यावसायी सहकारी विकास निगम की योजनाओं से जिले के हितग्राहियों को न्यूनतम लाभ दिया जा रहा है, जिसे ऊंट के मुंह में जीरा कहा जा सकता है। दूसरी ओर विभागीय अधिकारी इसके क्रियान्वयन में घोर अनियमितता बरत रहे हैं। जिसके चलते जरूरतमंद लोग लाभ से वंचित रह जा रहे हैं।
जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति कोरबा को पिछले दिनों अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और सफाई कामगार वर्ग के लिए 28 अलग-अलग योजना के तहत 63 जरूरतमंदो को लाभान्वित करने का लक्ष्य दिया गया था। बारह लाख से अधिक आबादी के जिले में यह लक्ष्य निश्चय ही बहुत कम है। लेकिन इससे भी वास्तविक जरूरतमंद और पात्र अभ्यर्थी लाभान्वित हुए हैं, कहना कठिन है। इसका कारण विभाग की कार्यप्रणाली है।
जानकारी के अनुसार गत 07 सितम्बर को जिला स्तरीय हितग्राही चयन समिति की बैठक संपन्न हुई, जिसमें हितग्राहियों के चयन का अनुमोदन किया गया। समिति संयोजक कलेक्टर हैं, जबकि जिले के चारों विधायक और क्षेत्रीय सांसद आमंत्रित सदस्य हैं। कुछ अन्य अधिकारी भी इसके सदस्य हैं। लेकिन हितग्राही चयन प्रक्रिया में विभाग के अधिकारियों की ही मुख्य भूमिका रहती है और समिति केवल औपचारिक रूप से काम करती है।

जिला अंत्यावसायी निगम की कार्यप्रणाली भ्रष्टाचार (Corruption or gross negligence) से ग्रसित है या लापरवाही से, यह जांच का विषय है। क्योंकि 07 सितंबर की बैठक में जिन योजनाओं पर मुहर लगाई गयी है, उनके अनेक आवेदक ऐसे हैं, जिन्हें आवेदन देने के बाद काउंसलिंग के लिए सूचना ही नहीं दी गयी और उन्हें अनुपस्थित बता दिया गया। अ. ज. जा. स्माल बिजनेस योजना में बिंझकोट (करतला) के गणेशराम राठिया ने आवेदन दिया था, लेकिन उसे काउंसलिंग में बुलाया ही नहीं गया। इसी तरह अ. जा. स्माल बिजनेस में करमचंद भारद्धाज ने आवेदन दिया था। उसे भी सूचना नहीं दी गयी। करमचंद ने 28-29 अगस्त को कार्यालय से संपर्क किया तो उसे बताया गया कि कई बार कोशिश की गयी, मगर उनसे बात नहीं हो सकी। यही कहानी कुछ अन्य हितग्राहियों की है। इसके अलावे योजनाओं के प्रचार-प्रसार में भी औपचारिकता ही की जाती है। इसकी पुष्टि विभाग को मिलने वाले आवेदनों से होती है। जैसे अ.जा.ट्रेक्टर ट्राली योजना, अ.ज.जा.ई-रिक्शा योजना, सफाई कामगार गुड्स कै रियर योजना में कोई आवेदन ही नहीं आया। जबकि सफाई कामगार महिला समृद्धि में 05 की जगह 01, महिला अधिकारिता में 05 में 01, माईक्रो क्रेडिट में 05 में 02, स्कीम अप टू में 15 में 06 आवेदन ही जमा हुए। यही नहीं सफाई कामगार वर्ग की योजनाओं में हितग्राहियों की काउंसलिंग का उल्लेख ही नहीं है। समिति के सदस्य और रामपुर विधायक ननकीराम कंवर ने बताया कि कुछ योजनाओं में तो जितने लोगों को लोन देना था, केवल उतने ही लोग काउंसलिंग में उपस्थित बताये गये हैं, अतिरिक्त आवेदक अनुपस्थित बता दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि इस बात को लेकर उन्होंने बैठक में सवाल भी उठाया था। बहरहाल कुल मिलाकर अंत्यावसायी निगम की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्न चिंह तो लग ही जाता है।

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